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Personality | माटी जिनकरा पे मान करेला

 

परंपरा तोड़नेवाला एक अद्भुत लौंडा, बेजोड़ कलाकार - चाईं ओझा

यह कहानी भोजपुरी के उस कलाकार की है जिसेे अपनी कला को साबित करनेे के लिए जीवन भर अपने परिवार और समाज से लड़ना पड़ा. कला के प्रति उसकी प्रतिबद्धता भोजपुरी के शेक्सपीयर माने जाने वाले भिखारी ठाकुर से कई मायने में कमतर नहीं थी. कुछ मामले में तो इनका संघर्ष भिखारी ठाकुर से भी कहीं आगे ठहरता है.

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एक सत्याग्रही संन्यासी

भोजपुरी क्षेत्र के शाहाबाद इलाके में सासाराम के निकट गांव के एक संन्यासी के बारे में कुछ जानकारी हम दे रहे हैं. इस अफसोस के साथ कि नित्य नये नायकों की तलाश में लगा भोजपुरी समाज अपने इस कीमती नायक को याद भी नहीं करता. उस नायक को, जिसने अपना पूरा जीवन ही राष्ट्र के लिए खपा दिया. जिसे महात्मा गांधी से लेकर डाॅ राजेंद्र प्रसाद और उस युग के तमाम नेताओं का सान्निध्य प्राप्त हुआ. जिसके व्यक्तित्व और कृतित्व क्षमता से अंगरेजों को भी परेशानी होती थी. उस संन्यासी को जानना काफी दिलचस्प है, जिसके नाम पर देश दुनिया में तो तरह-तरह के संस्थान वगैरह चल रहे हैं,जिसके नाम को इंटरनेट की दुनिया में खोजने पर हजारों रिजल्ट आते हैं लेकिन बिहार में उनका कोई नामलेवा नहीं. यहां बिदेसिया की ओर से प्रस्तुत है भवानी दयाल संन्यासी के बारे में संक्षिप्त जानकारी और उनका खुद का लिखा हुआ कुछ अंश-

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नौटंकी की पहली महिला

20 बरस की उम्र आते-आते गुलाब मिथक की तरह बनने लगीं. चाहनेवाले चारो ओर हो गये. दिलफेंकों का जमावड़ा भी लगने लगा. इसी बीच इत्र कंपनी चलानेवाले चंदर सेठ भी गुलाबो पर फिदा हो गये. नौटंकी कंपनी चालक तिरमोहन ने चाहा कि गुलबिया को प्यार, इष्क का रोग ना लगे लेकिन गुलबिया को यह रोग लगा. 23 साल की उम्र में चंदर सेठ के कहने पर नौटंकी दुनिया को अलविदा कर दी. पहले से षादी-षुदा चंदर सेठ गुलबिया को अपने घ्ज्ञर लेकर चले गये. मनमाफिक घर बनवा दिये, तमाम सुविधाएं लेकिन गुलबिया की जिंदगी कैदखाने में कैद होने लगी. चंदर जिस नौटंकी को देख फिदा हुए थे, उसी नौटंकी से गुलबिया को अलग रखने लगे. खुद मकनपुर में नौटंकी देखने जाते लेकिन गुलबिया को नहंी ले जाते. गुलबिया का मन छटपटाकर रह जाता.

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एहो देखीं जा -

लोक और शास्त्र दोनों मनुष्य है
‘‘ छन्नुलाल गाते कम, भाषण ज्यादा देते हैं’’
लोग मुझसे उम्मीद करते हैं, मैं भी बहक गयी तो...

बिसेस: भिखारी ठाकुर के

भोजपुरी सिनेमा के 50 बरिस

चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

नदिया के पार के 25 वर्ष

दामुल के 25 साल

25 Yrs of Damul