Lyrics & Poetry | गीत-गवनइ
सुंदर सुभूमि भैया भारत के देसवा से
सारण जिले के नयागांव में 30 अक्तूबर 1884 को जन्में बाबू रघुबीर नारायण ने ‘बटोहिया गीत की रचना 20वीं सदी के आरंभ में की थी. अभी बटोहिया गीत का शताब्दी वर्ष चल रहा है. कहा जाता है कि भारत से दक्षिण अफ्रीका , मॉरिशस, त्रिनिदाद आदि स्थानों पर गये भोजपुर पट्टी के मजदूरों के बीच यह गीत उस दौर में राष्ट्रगीत जैसा महत्व रखता था. इस गीत को काफी ख्याति मिली थी. प्रस्तुत है शताब्दी वर्ष के अवसर पर बाबू रघुबीर नारायण का अमर गीत ‘बटोहिया’
कुछ महेंद्र मिसिर के आउर कुछ ऐने ओने से जुगाड़ल गीत
निमिया के डाढ़ मइया, लावेली हिंडोलवा कि झूली-झूमी
मइया मोरी गावेली गीत कि झूली-झूमी
झुलत-झुलत मइया के लगली पियसिया, कि चली भइली
मलहोरिया अवास कि चलि भइली
एहो देखीं जा






