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Letters & Speeches | चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

 

राजेंदर बाबू के एगो खत पत्नी राजवंशी देवी के नाम

आज कल हमनी का अच्छी तरह से बानीं. उहां के खैर सलाह चाहीं, जे खुसी रहे. आगे एह तरह के हाल ना मिलल, एह से तबिअत अंदेसा में बाटे. आगे पहिले-पहिल कुछ अपना मन के हाल खुल कर के लिखे के चाहत बानी. चाहीं की तु मन दे के पढि के एह पर खूब विचार करिह अउर हमरा पास जवाब लिखिह. सब केहु जानेला कि हम बहुत पढनी, बहुत नाम भइल, एह से हम बहुत रोपेया कमाईब, से केहु के इहे उम्मेद रहेला कि हमार पढल-लिखल, सब रोपेया कमावे वास्ते बाटे. तोहार का मन हवे से लिखिह

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एहो देखीं जा

 

खूंटे में मोर दाल है, का खाउं-का पीउं, का ले के परदेस जाउं...
भोजपुरी लोकगीत में जीवन के मर्म

 

बिसेस: भिखारी ठाकुर के

भोजपुरी सिनेमा के 50 बरिस

चिठी-पतरी, आख्यान-व्याख्यान

नदिया के पार के 25 वर्ष

दामुल के 25 साल

25 Yrs of Damul

एगो ऐतिहासिक क्षण

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